अकर्मक क्रिया की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

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चलिए आज हम अकर्मक क्रिया की समस्त जानकारी पढ़ते और समझते हैं।

अकर्मक क्रिया क्या हैं

अकर्मक क्रिया का मतलब होता है कर्म के बिना। जिन क्रियाओं को कर्म की जरूरत नहीं पढ़ती या जो क्रिया प्रश्न पूछने पर कोई उत्तर नहीं देती उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं। 

जैसे :- तैरना, कूदना, सोना, ठहरना, उछलना, मरना, जीना, बरसना, रोना, चमकना, हँसता, चलता, दौड़ता, लजाना, होना, बढ़ना, खेलना, अकड़ना, डरना, बैठना, उगना, जीना, चमकना, डोलना, मरना, घटना, फाँदना, जागना, बरसना, उछलना, कूदना आदि।

वाक्य उदाहरण :-

  • वह जगता है।
  • वे कूदते हैं।
  • सोना चमकता है।
  • पक्षी उड़ रहे हैं।
  • बच्चा हंस रहा है।
  • चूहे उछल रहे हैं।
  • मेरा भाई सो रहा है।
  • साँप रेंगता है।
  • रेलगाड़ी चलती है।
  • दुल्हन शर्मा आ रही है।
  • यह साइकिल चलती है।
  • मीरा डर गई है।
  • बालक सोता है।
  • बच्चा रोता है।

ऊपर दिए गए वाक्यों में क्रिया का फल कर्ता पर पड़ रहा है। प्रश्न करने पर इनसे कोई उत्तर नहीं मिलता है। अतः ऊपर दिए गए वाक्यों में उपयोग में लाई जाने वाली सभी क्रियाएं अकर्मक क्रिया हैं।

सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया में अंतर

सकर्मक क्रियाअकर्मक क्रिया
जिस क्रिया का फल कर्ता पर पड़े उसे अकर्मक क्रिया कहते हैंजिस क्रिया का फल कर्म पर पड़े उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
सकर्मक क्रिया के वाक्यों से प्रश्न करने पर उससे उत्तर मिलता हैअकर्मक क्रिया के प्रश्नों से कोई उत्तर नहीं मिलता है।
सकर्मक क्रिया में कर्म, क्रिया और कर्ता तीनों होते हैंअकर्मक क्रिया में करने वाला और क्रिया तो होती है लेकिन कर्म नहीं होता।
हरि आम खाता है, तुम सच बोलते हो इत्यादि सकर्मक क्रिया के उदाहरण हैवह दौड़ता है, वह खाता है इत्यादि अकर्मक क्रिया के उदाहरण है।

जरूर पढ़िए : सकर्मक क्रिया

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